Tuesday, May 5, 2009

'बहन जी' के 'भाई'


"चढ़ गुंडों की छाती पर, मोहर लगाओ हाथी पर "
जी हाँ ये वक्तव्य थे किसी दौर में उत्तर प्रदेश में अपराधियों के ख़िलाफ़ जमकर अभियान चलाने वाली बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती उर्फ़ 'बहन जी' के लेकिन बदली हुई फिजा के कारण ये अब बीते दिनों की बातें हो चुकी हैं 'विजन दिल्ली' को देखते हुए मायावती ने अपने सिद्धांतों से समझौता करलिया है और बड़ी उदारता से बाहुबलियों, अपराधियों, एवं माफिआओं को टिकट देने में लगी हुई हैं
किसी समय अंसारी बंधुओं ( मुख्तार अंसारी एवं अफजाल अंसारी ) को अपराधी करार देकर जेल भिजवाने वाली बहन जी ने अब लोक सभा चुनाव में उन्हें क्रमशः वाराणसी और गाजीपुर से अपना उम्मीदवार बनाया है गौरतलब है की मुख्तार अंसारी पर कृष्णानंद राय हत्याकांड सहित, लूट, फिरौती, एवं बलवा आदि जघन्य अपराधों के कई मुक़दमे लंबित हैं और तो और बहन जी मुख्तार के समर्थन में यह कहते हुए भी नही अघा रहीं हैं कि "मुख्तार गरीबों के मसीहा हैं"
माफिआओं कि इस फेहरिस्त में अगला बहुचर्चित नाम है उन्नाव लोकसभा छेत्र से पार्टी के प्रत्याशी, कुख्यात अपराधी अरुण कुमार शुक्ला उर्फ़ 'अन्ना महाराज' का अरुण कुमार शुक्ला, पहले मुलायम सिंह के खासमखास हुआ करते थे लेकिन मुलायम सिंह द्वारा अपनी सांसद बनने कि इच्छा पूरी न होती देख इन्होने 'बहन जी ' का दामन थाम लिया हास्यास्पद बात तो यह है कि अन्ना के ऊपर लखनऊ के एक गेस्ट हाउस में बहन जी के ऊपर ही जानलेवा हमला कराने का आरोप है
हाल में ही बहन जी का दामन थामने वाले जौनपुर लोकसभा छेत्र के बसपा प्रत्याशी, हिस्ट्रीशीटर धनञ्जय सिंह का नाम भी इस सूची में प्रमुखता से शुमार होता है धनञ्जय सिंह पर लखनऊ एवं जौनपुर के विभिन्न थानों में तीन हत्याओं एवं गैंगस्टर एक्ट सहित दो दर्जन से अधिक मामले लंबित हैं धनञ्जय सिंह पर लोक निर्माण विभाग के इंजिनियर 'गोपाल सरन श्रीवास्तव' कि दिनदहाडे हत्या करने के आरोप पर ५०,००० रुपये का इनाम भी घोषित था
बहन जी ने उत्तर प्रदेश की ८० लोकसभा सीटों में से लगभग तीन दर्जन सीटों पर आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को उतारा है जिनमे बदायूं से डी पी यादव, श्रावस्ती से रिजवान जहीर, गोरखपुर से विनयशंकर तिवारी, संत कबीरनगर से भीष्मशंकर तिवारी तथा बागपत से मुकेश शर्मा आदि चर्चित चेहरे हैं उम्मीदवारों ने जहाँ बहन जी से अपनी-अपनी सीट निकालने का वादा किया है, वहीं बहन जी उनके आपराधिक मामलों पर कोई दंडात्मक कार्यवाई न करने का विश्वास दिलाया है
'बहन जी' और 'भाइयों' के बीच हुई इस डील में बहन जी का सिद्धांत वाक्य कुछ इस तरह ही है कि -

"या तो हमसे यारी कर,
या जेल जाने कि तैयारी कर "

3 comments:

बहुत सही लिखा है...

good.aasha hai bhavisya me bhi yese art padne ko milte rahege

बेहतरीन लेख है

 
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